आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस

आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस

आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस

संदर्भ- सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रणाली नई प्रणाली शुरु की जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस का प्रयोग सुप्रीम कोर्ट के कार्यों में किया जाएगा। इसके तहत एआई ट्रांसक्रिप्ट को कोर्ट नम्बर के लाइव स्ट्रीमिंग के तहत देखा जा सकता है। 

आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस- एआई प्रौद्योगिकियों का एक समूह है जो मशीनों को उच्च स्तर की बुद्धिमत्ता के साथ कार्य करने और समझने, और कार्य करने की मानवीय क्षमताओं का अनुकरण करने में सक्षम बनाता है। इस प्रकार, कंप्यूटर विज़न और ऑडियो प्रोसेसिंग छवियों, ध्वनि और भाषण को प्राप्त और संसाधित करके अपने आसपास की दुनिया को सक्रिय रूप से देख सकते हैं।

इन मानवीय क्षमताओं को अनुभव से सीखने और समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता से बढ़ाया जाता है। इसके अंतर्गत विशेषज्ञ प्रणाली, प्राकृतिक भाषा प्रक्रिया, वाक पहचान व मशीन लक्ष्य होते हैं। कोई भी प्रोग्रामिंग भाषा या मशीन लर्निंग मात्र इसका पर्याय नहीं होती है।

वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस का प्रयोग कई उद्योगों द्वारा किया जा रहा है, जो वर्तमान में मानव जीवनशैली में अपना स्थान बना चुका है। इसका अनुकरण करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस ज्यूडिश्यरी में शामिल करने की कवायद की है।

अनुप्रयोग- 

  • विभिन्न निर्णय लेने वाले कार्यों में एआई का प्रयोग
  • बेहतर कनेक्टिविटी को सक्षम करना।
  • उत्पादकता बढ़ाना 
  • नए ज्ञान संरचना और इंटैलिजेंस सिस्टम की आवश्यकता के लिए आदि।

आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस की वैश्विक प्रासंगिकता

एआई को विकसित करने और लागू करने के संभावित आर्थिक और सामाजिक लाभों के बारे में दुनिया भर के देश तेजी से जागरूक हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, चीन और यू.के. का अनुमान है कि 2030 में उनके सकल घरेलू उत्पाद का क्रमश: 26% और 10% एआई से संबंधित गतिविधियों और व्यवसायों से प्राप्त होगा। अमेरिका, चीन यूके, जापान जैसे देशों ने अपनी औद्योगिक रणनीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग को स्वीकारा है।

भारत में आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस-

आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस तकनीकि का प्रयोग भारत में समावेशी विकास के लिए किया जा रहा है जैसे किसानों को सही समय पर सही सलाह देने के लिए आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस काफी कारगर साबित हो रही है। नैस्कॉम व फिक्की की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की आर्थिक प्रगति में इसका एक विशेष योगदान होगा। 

एक राष्ट्रीय एआई रणनीति को एक ऐसे ढांचे पर आधारित करने की आवश्यकता है जो भारत की अनूठी जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुकूल हो, और साथ ही, एआई विकास का लाभ उठाने की देश की पूरी क्षमता हासिल करने में सक्षम हो। इस तरह के ढांचे को निम्नलिखित तीन अलग-अलग, फिर भी अंतर-संबंधित घटकों के एकत्रीकरण के रूप में देखा जा सकता है:

  1. अवसर: भारत के लिए एआई का आर्थिक प्रभाव
  2. एआई फॉर ग्रेटर गुड: सामाजिक विकास और समावेशी विकास
  3. दुनिया के 40% के लिए एआई गैरेज: उभरते और विकासशील लोगों के लिए पसंद का समाधान प्रदाता दुनिया भर में अर्थव्यवस्थाएं (पूर्व-चीन)।

 आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस टैक्नोलॉजी : सामाजिक और समावेशी विकास के लिए सुप्रीम कोर्ट में आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस की प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण टैक्नोलॉजी का प्रयोग किया जा रहा है। 

यह टैक्नोलॉजी कम्प्यूटर को बोले गए शब्दों व भाषा को कम्प्यूटर उसी तरह समझता है जिस तरह मानव द्वारा बोले या समझे जाते हैं। इस प्रोग्रामिंग में एक भाषा को दूसरी भाषा में परिवर्तित करता है और उसे समझकर जवाब देता है। यह टैक्नोलॉजी वॉयस-ऑपरेटेड जीपीएस सिस्टम, डिजिटल असिस्टेंट, स्पीच-टू-टेक्स्ट डिक्टेशन सॉफ्टवेयर, ग्राहक सेवा चैटबॉट और अन्य उपभोक्ता सुविधाओं में उपलब्ध है। 

  •  स्पीच-टू-टेक्स्ट डिक्टेशन सॉफ्टवेयर- यह वॉइस डेटा को टैक्स्ट डेटा में आसानी से बदलने में सहायक होता है।
  • भाषण टैगिंग- किसी भाषण में प्रयुक्त शब्द या कुछ शब्दों के आधार पर उस भाषण की पहचान करना।
  • संज्ञा की पहचान- किसी शब्द जो CAPSA में लिखा गया है उसे किसी के नाम या स्थान के रूप में पहचानती है।

इस टैक्नोलॉजी के माध्यम से अदालत की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा। अमेरिका व यूके में भी एआई के माध्यम से अदालती कार्यवाहियों का रिकॉर्ड रखा जाता है। 

भारत सरकार के प्रयास

  • भारत में आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस का प्रयोग उन प्रयासों पर केंद्रित है जिसके द्वारा भारत शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि व बुनियादी ढांचों के कार्यों में त्रुटियों को कम किया जा सके। 
  • भारत द्वारा एआई के माध्यम से 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया या है।
  •  भारत में एआई के कार्य करने के तरीकों को उन्नत बनाने के लिए किया जा रहा है। इसलिए इसे मेक इन इंडिया पहल से जोडने की कवायद की जा रही है।
  • 5 जी टैक्नोलॉजी के विकास के लिए बजट निर्धारित किया गया है जो एआई को भी गति देगा। 
  • एआई से संबंधित पीएचडी के लिए विशेष छात्रवृत्ति का प्रावधान किया गया है।

केंद्र सरकार ने 2017 में आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से संबंधित 7 सूत्रीय रणनीति तैयार की है जिसके प्रमुख तत्व हैं-

  • मानव मशीन वार्ता के लिए विकासशील विधि विकसित करना।
  • एआई से संबंधित शोध व विकास को बढ़ावा देना।
  • एआई प्रणाली में सुरक्षा
  • नैतिक, सामाजिक व कानूनी प्रणाली 
  • एआई तकनीक का मूल्यांकन करना आदि।

स्रोत

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