खालिस्तान आंदोलन

खालिस्तान आंदोलन

खालिस्तान आंदोलन 

संदर्भ- पंजाब में अमृतपाल सिंह के अनुयायी उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही सिख कैदियों को मुक्त करने के लिए निरंतर आंदोलन किए जा रहे है। ये कैदी लगभग तीन दशकों से देश के विभिन्न भागों में कैद हैं।

अमृतपाल सिंह, जनरल सिंह भिंडरावाले के अनुयायी हैं इन्हें भिंडरावाले 2.0 भी कहा जाता है। यह पिछले 2 वर्षों से वारिस पंजाब दे संगठन को संभाल रहे थे। अमृतपाल सिंह के अनुसार खालिस्तान सिखों की विचारधारा है जो कभी मरती नहीं।

बंदी सिंह- बंदी सिंह शब्द सिख कैदियों को संबोधित करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो पंजाब में उग्रवादी गतिविधियों में सम्मिलित होने के अपराध में देश के विभिन्न हिस्सों में जेलों में है। 1990 के दशक में उग्रवाद समाप्त कर दिया था। वर्तमान में कई कैदी शारीरिक रूप से विक्षिप्त हो गए हैं। सिख समुदाय की मांग है कि उन्हें मुक्त किया जाना चाहिए।

खालिस्तान आंदोलन- 

  • वर्तमान पंजाब में सिखों की एक अलग सम्प्रभु राज्य बनाने के लिए एक लड़ाई है। 
  • सिख धर्म के आधार पर बने नए राज्य को खालिस्तान का नाम दिया गया।
  • खालिस्तान अपने राज्य के लिए पंजाब समेत उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश, दिल्ली व चंडीगढ़ के भी कुछ क्षेत्रों का दावा करता है। 
  • खालिस्तान शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1940 में खालिस्तान नामक पत्रिका में हुआ था।
  • खालिस्तान की मांग की शुरुआत ब्रिटिश राज्य के पतन के बाद शुरु हुई थी।
  • ऑपरेशन ब्लू स्टार व ऑपरेशन ब्लैक थंडर के बाद भारत में आंदोलन को कुचल दिया गया।

आंदोलन की तत्कालीन परिस्थितियां

भारत विभाजन- स्वतंत्रता के समय तैयार हुई जब पंजाब विभाजन का शिकार था। पंजाब दो भागों में बंट चुका था। पाकिस्तान व भारत से शरणार्थी एक अलग हुए देशों की ओर पलायन कर रहे थे। 

प्रवासी भारतीयों का समर्थन- सिक्ख समुदाय को सर्वाधिक मदद कनाडा, ऑस्ट्रेलिया व ब्रिटेन में रह रहे प्रवासी सिक्ख समुदाय और पाकिस्तान के आईएसआई समुदाय ने समर्थन दिया। जिससे पंजाब में यह आंदोलन विकसित हुआ।

सांस्कृतिक विभाजन सिक्ख साम्राज्य की राजधानी लाहौर पाकिस्तान के क्षेत्र में और अधिकांश सिक्ख समुदाय भारत में था। वे समस्त सिक्ख समुदाय की संस्कृति को सहेजने के लिए प्राचीन सिक्ख साम्राज्य के आधार पर एक अलग राज्य बनाना चाहते थे।

खालिस्तान आंदोलन से संबंधित घटनाएं

    • 1955 में राज्य पुनर्गठन आयोग ने राज्य की इस मांग को खारिज कर दिया।
    • 1966 में वर्षों के विरोध के बाद पंजाबी राज्य का पुनर्गठन किया गया।  इसके अंतर्गत सिख बहुल राज्य को हिंदी भाषी राज्यों हरियाणा व हिमांचल प्रदेश से अलग कर दिया गया। जिसके बाद आनंदपुर साहिब संकल्प ने पंजाब राज्य के लिए स्वायत्तता की मांग की।
  • आनंदपुर साहिब संकल्प – पंजाब में अकाली दल ने पंजाबी सूबा आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1973 में पंजाब के आनंदपुर सहिब में अकाली दल की एक भा आयोजित हुई जिसमें आंदोलन के उद्देश्यों व मांगों को रखा गया। अकाली दल खालिस्तान से संबंधित मांगों के कारण एक वैश्विक मुद्दा बन गया था।
  •  जनरल सिंह भिंडरावाले- अकाली दल से परे जनरल सिंह भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर में रहकर अधिक स्वायत्तता की मुखर मांग की। 1982 में उन्होंने ने धर्म विरुद्ध मोर्चा नामक एक सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरु किया। उनके आंदोलन में आनंदपुर साहिब संंकल्प के अतिरिक्त ग्रामीण सिक्ख आबादी की चिंताओं को संबोधित किया गया था। वे पंजाब में एक तेज तर्रार वक्ता के रूप में सामने आए, उनके समय आंदोलन अधिक हिंसक होने लगा था। हिंसक व प्रभावपूर्ण आंदोलन होने के कारण इंदिरा गांधी सरकार ने इसका विरोध किया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार – 

  • जनरल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में हिंसक गतिविधियों की बढ़ोतरी के कारण भारतीय सरकार ने ऑपरेशन ब्लू स्टार प्रारंभ किया।
  • भारत सरकार ने पंजाब की सड़कों पर 1-3 जून 1984 को स्थलीय व हवाई यातायात को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके साथ ही अमृतसर में जल व खाद्य आपूर्ति को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया।
  • 6 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर में एक व्यापक अभियान चलाया गया और 7 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर को भारत सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया।  

ऑपरेशन ब्लू स्टार के परिणाम- 

  • इस ऑपरेशन में लगभग 83 सैनिकों तथा 493 आम लोगों की मृत्यु हो गई।तथा अन्य लगभग  3000 लोग हताहत हुए। 
  • ऑपरेशन में भिंडरावाले को मार दिया गया। जिससे सिख समुदाय आक्रोशित हो गया और दुनियाभर में खालिस्तान की मांग और तेज हो गई। 
  • 31 अक्टूबर 1984 को दो सिख अंगरक्षकों ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी।
  • इससे देश में सांप्रदायिक हिंसा को प्रोत्साहित किया, लगभग 3000 लोग हिंसा में मारे गए। 
  • कनाडा के सिख उग्रवादियों ने एयर इंडिया के प्लेन को उड़ा दिया जिसमें 329 लोग मारे गए। उन्होंने इसे भिंडरावाले की हत्या का बदला कहा। 
  • वर्तमान में अमृतपाल सिंह (भिंडरावाले के अनुयायी) के अनुयायी उनके लिए आक्रोशित हैं। 

स्रोत

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