मानव पशु संघर्ष 

मानव पशु संघर्ष 

मानव पशु संघर्ष 

संदर्भ –  हाल के कुछ वर्षों से मानव पशु संघर्ष की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है जो जंगलों के समीप लगभग सभी क्षेत्रों के लिए समस्या का कारण बना हुआ है, ऐसे ही एक संघर्ष में छत्तीसगढ़ के सुरजपुर जिले में हाथी ने दो लोगों को कुचल कर मार डाला।   

मानव पशु संघर्ष – जलवायु में हो रहे बदलावों के चलते वन्य पशु और मानवों के मध्य लगातार संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो रही है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब मानव व पशु एक ही क्षेत्र में चले जाते हैं। और संसाधनों के लिए संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

कारण

  • वन्यजीवों के प्रति असहनशीलता जैसे फसल की रक्षा हेतु किसान खेत के चारों ओर बिजली की खुली तार लगाते हैं प्रवेश करते हुए वन्य जीवों को करंट लगता है ओर वे खुंखार हो जाते हैं।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण वन्य जीव अनुकूलित आवास की तलाश में मानवीय बस्ती में आ जाते हैं।  
  • न्यू मैक्सिकों के अध्ययन के अनुसार अल नीनो या अल नीना चक्र के समय सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जो संसाधनों की कमी के कारण मानव पशु संघर्ष का कारण बनती है।
  • अधिक उपज के लालच में मानव द्वारा वनों का कटान कर वनों को कृषि क्षेत्र में परिवर्तित करने से बाघ, हाथी और भालू जैसे आक्रामक जानवरों के आवास स्ठल सिकुड़ जाते हैं। और वे मानव बस्तियों में आकर जन, धन को नुकसान पहुँचाने लगते हैं। 
  • भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण नीली भेड़ों के पसंदीदा भोजन की उत्पत्ति में कमी आई है, जिस कारण उनकी भोजन के लिए मानवीय आवासों में आवाजाही बढ़ने लगी। इसी प्रकार हाथी भी अपने पसंदीदा भोजन बांस के पत्तों की तलाश में जंगलों से बाहर आ जाते हैं। 
  • एक वयस्क हाथी को 2 क्विंटल हरा चारा व 150 किलो स्वच्छ पानी की आवश्यकता होती है इस आवश्यकता की पूर्ति न होने पर हाथी वन्य क्षेत्र से बाहर आ जाते हैं।
  • मानवीय विकास के कारण प्राकृतिक वन्य जीव गलियारे बाधित हुए हैं। भिन्न भिन्न क्षेत्र के वन्य जीवों की आबादी के बीच संपर्क बनाने में ये गलियारे सहायक होते हैं।

निवारण- 

  • बाघ संरक्षण परियोजना के अनुसार किसी भी खतरे निपटने के लिए उचित तकनीकी जैसे- वाहन, ट्रैक्विलाइजर गन, दूरबीन और रेडियो सैट अप उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • एक शोध के अनुसार मधुमक्खी के छत्ते की बाढ़ से पशु फसलों के पास नहीं आते।
  • IIM काशीपुर और DIC द्वारा एक परिणाया प्रकृति  डिवाइस बनाई गई है। जो जानवरों की उपस्थिति को भांपकर सायरन की ध्वनि उत्सर्जित करती है। ध्वनि की तीव्रता इस प्रकार रखी जाती है कि जो पशु सहन न कर पाएँ और फसलों को बचाया जा सके।
  • प्राकृतिक गलियारे बाधित होने क कारण मानव निर्मित गलियारों का निर्माण हो रहा है ,हाल ही में एशिया का सबसे लंबा वन्य जीव गलियारे का निर्माण किया जा रहा है। जिससे वे बिना किसी बाधा के अन्य वनों में आवागमन कर सके।

स्रोत-

www.thehindu.com

https://www.amarujala.com/chhattisgarh

https://www.amarujala.com/dehradun/uttarakhand-news-iim-kashipur-made-a-device-in-collaboration-with-dic-to-stop-human-wildlife-conflict

Yojna IAS Daily current affairs Hindi med 19th September

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