अपशिष्ट से ऊर्जा प्रोजैक्ट ( Waste to Energy Project)

अपशिष्ट से ऊर्जा प्रोजैक्ट ( Waste to Energy Project)

अपशिष्ट से ऊर्जा प्रोजैक्ट ( Waste to Energy Project)

संदर्भ- हाल ही में केरल सरकार ने अपशिष्ट से ऊर्जा प्रोजैक्ट को कोझिकोड़ में मंजूरी दी है। प्रोजैक्ट के निर्माण कार्य का लक्ष्य 2 वर्ष रखा जाएगा और इस प्रोजैक्ट की ऊर्जा उत्पादन क्षमता  6 MW तक होगी।

अपशिष्ट से ऊर्जा प्रोजैक्ट  ( Waste to Energy Project)

  • अपशिष्ट को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए नॉन रिसाइकलेबल सूखे अपशिष्ट या कचरे की आवश्यकता होती है।
  • भारत में कुल ठोस अपशिष्ट का 55-60% जैव निम्नीकरण अपशिष्ट होता है। और अजैव निम्नीकरण अपशिष्ट 25-30% तक और पानी के साथ प्रवाहित निक्षेप जैसे स्लिट, पत्थर आदि 15 % तक होता है।
  • और इसमें से अजैव निम्नीकरण का केवल 2-3 % अपशिष्ट जो ठोस प्लास्टिक, मैटल, ई वेस्ट आदि ही पुनर्चक्रण(recycle) करने योग्य होता है। इसलिए बचे हुए अजैव निम्नीकरण अपशिष्ट का अपघटन सबसे चुनौतिपूर्ण होता है। इसी अपशिष्ट को ऊष्मा  के माध्यम से बिजली उत्पादन के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

कोझिकोड़ प्रोजैक्ट- 

  • कोझिकोड़ की जनसंख्या 6.3 लाख है।
  • प्रतिदिन कोझिकोड़ में 300 टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 205 टन जैव निम्नीकरण कचरा उत्पादित होता है। कोझिकोड़ की नगरपालिका जैविक कचरे का प्रयोग जैविक खाद बनाने के लिए कर रही है।
  • 95 टन अजैव निम्नीकरण कचरे में से मात्र 5% अपशिष्ट पुनर्चक्रण करने योग्य होता है। शेष अजैव निम्नीकरण कचरे का प्रयोग विद्युत उत्पादन करने के लिए किया जाता है।

अपशिष्ट से ऊर्जा प्लांट की असफलता के कारण

(1) कैलोरी मान-

  • किसी पदार्थ को दी जाने वाली ऊष्मा का वह मान जो पदार्थ की एक इकाई मात्रा को पूरी तरह से ऑक्सीकृत करने में मदद करता है, उसे कैलोरी मान कहा जाता है. इसे kcal/kg या KJ/kg में मापा जाता है।
  • अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन करने के लिए उसे उच्च मात्रा में ऊष्मा दी जाती है, अजैव निम्नीकरण ठोस अपशिष्ट जो रिसाइकल करने योग्य नहीं होता, का कैलोरी मान लगभग 2800-3000 Kcal/Kg तक रहता है जिससे ऊर्जा उत्पादित की जा सकती है।
  • भारत में कचरे के अनियोजित पृथक्करण के कारण यह मान प्राप्त करना चुनौतिपूर्ण है। यहाँ मिश्रित अपशिष्ट का कुल कैलोरी मान 1500 kcal/kg तक रहता है, जो पावर उत्पादन के लिए आवश्यक कैलोरी मान से बहुत कम है। 

(2) उच्च लागत- अपशिष्ट से प्राप्त ऊर्जा लगभग 7-8 रुपये प्रति यूनिट प्राप्त होती है। जबकि कोल, हाइड्रोइलैक्ट्रिक पावर प्लांट और सोलर पावर प्लांट से इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड को 3-4 रुपये प्रति यूनिट विद्युत ऊर्जा प्राप्त हो जाती है।

(3) इस प्रकार अपर्याप्त मूल्यांकन, उच्च अपेक्षा और अपर्याप्त वर्गीकरण के कारण अपशिष्ट ऊर्जा प्लांट सफल नहीं हो पाते हैं।

कोझिकोड़ प्लांट की चुनौतियों का विश्वलेषण-

कोझिकोड़ प्रोजैक्ट क्षेत्र की जनसंख्या और अपशिष्ट उत्पादन दर लगभग 100 TDP आंकी गई है। लोकल व अर्बन क्षेेत्र से जनसंख्या और अपशिष्ट उत्पादन दर लगभग 50 TDP आंकी गई है। 1 MW  ऊर्जा उत्पादन करने में लगभग 50 TDP  अपशिष्ट (अजैव निम्नीकरण ठोस अपशिष्ट जो रिसाइकल करने योग्य नहीं होता) की आवश्यकता होती है। अतः इस प्लांट की उच्चतम उत्पादन क्षमता 3 MW हो सकती है। जबकि इस प्लांट के लिए ऊर्जा की उच्च उत्पादन क्षमता का लक्ष्य 6 MW आंकी गई है। जो वास्तविक क्षमता से बहुत कम है।

कोझिकोड़ नगरपालिका की अपशिष्ट एकत्रीकरण क्षमता. अपशिष्ट पृथकीकरण और अपशिष्ट, अपशिष्ट में नमी की मात्रा, अपशिष्ट की कम कैलोरी मान आदि प्लांट की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

आगे की राह

  • चुनौतियों का सामना करने के लिए प्लांट को नगरपालिका व राज्य के जनसामान्य के सम्पूर्ण सहयोग की आवश्यकता होगी।
  • नगरपालिका को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्लांट में केवल अजैव निम्नीकरण प्रकार का ही अपशिष्ट सप्लाई किया जाए।
  • नगर पालिका या SWM के लिए जिम्मेदार विभाग को बिजली उत्पादन की उच्च लागत के बारे में व्यावहारिक होना चाहिए,
  • नगरपालिका, संयंत्र संचालक और बिजली वितरण एजेंसी के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते के रूप में कार्य किया जा सकता है। 
  • क्षेत्र अध्ययन करना और अन्य परियोजनाओं के अनुभव से सीखना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

स्रोत

Yojna IAS Daily current affairs hindi med 22nd March 2023

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